फर्टिलिटी देखभाल: एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता, नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी भोपाल में डॉ. पायल रघुवंशी अग्रणी भूमिका में

भारत में प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, विवाह की बढ़ती आयु, कार्य-जीवन संतुलन की चुनौतियां और कुछ चिकित्सीय कारणों के चलते फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का सामना करने वाले दंपतियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में विशेषज्ञ फर्टिलिटी देखभाल केवल व्यक्तिगत आवश्यकता नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में भी उभर रही है।

इसी परिप्रेक्ष्य में भोपाल स्थित नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. पायल रघुवंशी (Dr. Payal Raghuwanshi) उन विशेषज्ञों में शामिल हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों, मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण और आधुनिक रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के माध्यम से फर्टिलिटी देखभाल को अधिक सुलभ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 भारत में बांझपन संकट: आंकड़ों के माध्यम से

फर्टिलिटी से जुड़ी चुनौतियां केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि यह वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रही हैं। हाल के वर्षों में प्रकाशित रिपोर्टें बताती हैं कि भारत सहित दुनिया भर में बड़ी संख्या में दंपति गर्भधारण से जुड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

 राष्ट्रीय स्तर पर बांझपन की दर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2023 की Infertility Prevalence Estimates (1990–2021) रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग हर 6 में से 1 वयस्क (करीब 17.5%) अपने जीवनकाल में किसी न किसी समय बांझपन (Infertility) का अनुभव करता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह समस्या केवल उच्च आय वाले देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में भी लगभग समान स्तर पर देखी जाती है।

भारत में व्यापक राष्ट्रीय रजिस्ट्री उपलब्ध नहीं होने के कारण सटीक आंकड़े अलग-अलग अध्ययनों में भिन्न हो सकते हैं। हालांकि, भारतीय अध्ययनों और उपलब्ध अनुमानों के आधार पर माना जाता है कि प्रजनन आयु के लगभग 10–15% दंपति बांझपन से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि कुछ अनुमानों के अनुसार भारत में लगभग 2.75 करोड़ (27.5 million) दंपति किसी न किसी रूप में फर्टिलिटी संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

 शहर बनाम ग्रामीण प्रवृत्तियां

अध्ययनों से यह भी संकेत मिलता है कि शहरी क्षेत्रों में देर से विवाह, बढ़ती मातृत्व आयु, तनावपूर्ण जीवनशैली, मोटापा, PCOS और कार्य-संबंधी दबाव जैसे कारकों के कारण फर्टिलिटी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श लेने वाले दंपतियों की संख्या अधिक है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और विशेषज्ञ सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण कई मामलों में जांच और उपचार में देरी हो सकती है। हालांकि, क्षेत्रीय फर्टिलिटी केंद्रों के विस्तार और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है।

 सरकारी पहल और स्वास्थ्य नीतियां

भारत में मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। फर्टिलिटी स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना और समय पर विशेषज्ञ सलाह को प्रोत्साहित करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 वर्तमान योजनाएं

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम मुख्य रूप से मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रजनन सेवाओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित हैं। इनके माध्यम से लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, परामर्श और आवश्यक जांच के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

 भविष्य की आवश्यकताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फर्टिलिटी स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता अभियान, प्रारंभिक जांच (Early Evaluation), प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता और उन्नत रिप्रोडक्टिव मेडिसिन सेवाओं तक समान पहुंच को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी। इससे अधिक दंपतियों को समय पर उचित उपचार विकल्प मिल सकते हैं।

 डॉ. पायल रघुवंशी नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी भोपाल में: राष्ट्रीय स्तर का विशेषज्ञ

रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के क्षेत्र में डॉ. पायल रघुवंशी ने चिकित्सा उत्कृष्टता और मरीज-केंद्रित देखभाल के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है। वे साक्ष्य-आधारित उपचार (Evidence-Based Care) और प्रत्येक मरीज की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने पर विशेष जोर देती हैं।

 योग्यता और अनुभव

डॉ. पायल रघुवंशी ने श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, इंदौर से MBBS तथा बी. जे. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, पुणे से MS (Obstetrics & Gynaecology) प्राप्त किया। वे MBBS और MS दोनों में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भोपाल के बंसल हॉस्पिटल से Fellowship in Reproductive Medicine पूरी की है तथा MRCOG Part 1 भी उत्तीर्ण किया है।

उन्हें स्त्री रोग एवं फर्टिलिटी मेडिसिन के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता IVF असफल मामलों (IVF Failures), डोनर ट्रीटमेंट, पुरुष बांझपन (Male Infertility), बार-बार गर्भपात (Recurrent Miscarriages), PCOS तथा कम ओवेरियन रिजर्व (Low Ovarian Reserve) या अधिक मातृ आयु (Advanced Maternal Age) वाली महिलाओं के उपचार में विशेष रूप से मानी जाती है। वे डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी और फर्टिलिटी एन्हांसिंग लैप्रोस्कोपिक सर्जरी भी करती हैं।

 राष्ट्रीय स्तर पर योगदान

डॉ. रघुवंशी का कार्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है। उनका क्लिनिकल दृष्टिकोण इस बात पर आधारित है कि प्रत्येक मरीज को उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराया जाए। आधुनिक फर्टिलिटी उपचार को अधिक व्यवस्थित और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में उनका योगदान उन्हें अपने क्षेत्र के उभरते विशेषज्ञों में स्थान दिलाता है।

 नोवा आईवीएफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों के साथ कैसे संरेखित है?

आज फर्टिलिटी देखभाल केवल उपचार प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर जांच, सटीक निदान, जागरूकता और वैज्ञानिक उपचार पद्धति को बढ़ावा देना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी का दृष्टिकोण इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित है, जहां आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और मरीज-केंद्रित देखभाल के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण फर्टिलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

 सभी के लिए किफायती देखभाल: नोवा आईवीएफ का मिशन

फर्टिलिटी उपचार कई दंपतियों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन निर्णय होता है। इसलिए उपचार प्रक्रिया में स्पष्ट जानकारी, पारदर्शी परामर्श और मरीज की परिस्थितियों के अनुरूप उपचार योजना तैयार करना आवश्यक माना जाता है। इसी सोच के साथ नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी विभिन्न मरीजों की आवश्यकताओं के अनुसार उपचार विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास करता है, ताकि गुणवत्तापूर्ण फर्टिलिटी देखभाल अधिक लोगों तक पहुंच सके।

 डॉ. पायल रघुवंशी का भारत की फर्टिलिटी दृश्य में योगदान

डॉ. पायल रघुवंशी का मानना है कि सफल फर्टिलिटी उपचार केवल आधुनिक तकनीक का परिणाम नहीं होता, बल्कि सही समय पर जांच, सटीक निदान, व्यक्तिगत उपचार योजना और मरीज के साथ निरंतर संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

विशेष रूप से जटिल मामलों, जैसे बार-बार IVF असफल होना, पुरुष बांझपन, PCOS, कम ओवेरियन रिजर्व और उन्नत मातृ आयु में उनका अनुभव अनेक दंपतियों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन का आधार बनता है। उनके कार्य का उद्देश्य केवल चिकित्सकीय उपचार देना नहीं, बल्कि पूरी उपचार यात्रा को अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाना भी है।

 कंट्री फर्स्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य फीचर

भारत में प्रजनन स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा संस्थानों और बढ़ती जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. पायल रघुवंशी जैसे विशेषज्ञ इसी बदलाव का हिस्सा हैं, जो वैज्ञानिक चिकित्सा, नैतिक उपचार पद्धति और मरीज-केंद्रित देखभाल के माध्यम से फर्टिलिटी मेडिसिन को आगे बढ़ा रहे हैं।

जैसे-जैसे देश में फर्टिलिटी स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे विशेषज्ञों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जा रही है, जो आधुनिक चिकित्सा को संवेदनशील देखभाल के साथ जोड़कर दंपतियों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

डॉ. पायल रघुवंशी और नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी भोपाल के कार्य एवं फर्टिलिटी देखभाल के दृष्टिकोण के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।